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4000 से अधिक जन प्रतिनिधियों पर क्रिमिनल मामले में यूपी नम्बर 1

By Republichindi desk | Publish Date: 12/6/2018 3:10:38 PM
4000 से अधिक जन प्रतिनिधियों पर क्रिमिनल मामले में यूपी नम्बर 1
न्यूज़ डेस्क. सुप्रीम कोर्ट ने बताया है कि संसद (सांसदों) और राज्य विधानसभाओं के वर्तमान और पूर्व सदस्यों के खिलाफ 4,000 से अधिक आपराधिक मामले लंबित हैं. गौरतलब है कि अदालत ने बीजेपी के प्रवक्ता और वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा आपराधिक मामलों में दोषी राजनेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने की याचिका की सुनवाई की थी. 24 पेज की रिपोर्ट के मुताबिक मौजूदा सांसदों और विधायकों के खिलाफ 2,324 मामले और पूर्व विधायकों के खिलाफ 1,675 मामले पाए गए थे. रिपोर्ट के अनुसार कुल 4,122 लंबित मामलों में से 1,991 मामले ऐसे थे जहां चार्ज ही फ्रेम नहीं किए गए थे, यह मामले देश के 440 जिलों के हैं. उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा विधायकों के खिलाफ 992 मामले दर्ज किए गए. इसके बाद ओडिशा में 331 और तमिलनाडु में 321 मामले दर्ज किए गए.

बिहार व केरल में शीघ्र निपटान का आदेश-
 
अश्विनी कुमार उपाध्याय ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 के प्रावधानों को चुनौती दी थी, जिसमें जेल की सजा काटने के छह साल बाद तक चुनाव लड़ने से राजनेताओं को रोका जाता है. याचिका में उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और अधिकतम आयु सीमा तय करने के लिए केंद्र और चुनाव आयोग (ईसी) से भी एक दिशा की मांग की गई है. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने रिकॉर्ड पर रिपोर्ट ली और बिहार और केरल में मामलों के शीघ्र निपटान का आदेश दिया और कहा कि उच्च न्यायालयों को एक सत्र अदालत और एक मजिस्ट्रेट अदालत की बजाय बड़ी संख्या में सत्र और मजिस्ट्रेट अदालतों को मामले भेजने चाहिए. यह भी निर्देश दिया कि प्रत्येक नामित अदालत के लिए एक प्रक्रिया होनी चाहिए और वर्तमान सांसदों और विधायकों के खिलाफ कथित ऐसे मामले जिनकी सजा मृत्यु या फिर आजीवन कारावास है, उन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

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