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बीसीसीआई में चल रही है दादागिरी, गांगुली के लिए नियम बदलने की तैयारी

By Republichindi desk | Publish Date: 11/26/2019 12:14:51 PM
बीसीसीआई में चल रही है दादागिरी, गांगुली के लिए नियम बदलने की तैयारी

रिपब्लिक हिंदी डेस्क: कोलकाता के ईडन गार्डेंस पर भारत और बांग्लाfदेश के बीच डे-नाइट टेस्टa मैच का सफल आयोजन कर बीसीसीआई के अध्यडक्ष सौरव गांगुली ने साबित कर दिया है कि प्रशासनिक दक्षता में भी वह किसी से कम नहीं. सौरव के नेतृत्वर में मैच का सफलतापूर्वक आयोजन हुआ. खचाखच दर्शक भरे रहे. दादा ने दर्शकों का ध्यान रखा. यह साबित हो गया है कि लंबे समय तक सौरव की दादागिरी चलनेवाली है. बीसीसीआई ने भी सौरव के लंबे कार्यकाल के लिए नियमों में संशोधन करने का विचार किया है.

बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष अरुण धूमल ने कहा कि बोर्ड की आगामी वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में पदाधिकारियों के 70 साल की उम्र सीमा को बदलने के बारे में विचार नहीं किया जाएगा लेकिन कूलिंग ऑफ (दो कार्यकाल के बाद विश्राम का समय) के नियम को बदलने पर विचार किया जाएगा क्योंकि इससे अधिकारियों के अनुभव का सही फायदा होगा. सौरव गांगुली के अध्यक्ष बनने के बाद पहली एजीएम के लिए जारी कार्यसूची में बोर्ड ने मौजूदा संविधान में महत्वपूर्ण बदलाव करने का प्रस्ताव दिया है जिससे सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर आधारित सुधारों पर असर पड़ेगा.

सौरव गांगुली के अध्यक्ष बनने के बाद पहली एजीएम के लिए जारी कार्यसूची में बोर्ड ने मौजूदा संविधान में महत्वपूर्ण बदलाव करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त लोढ़ा समिति की सिफारिशों पर आधारित सुधारों पर असर पड़ेगा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुमोदित नए कानून के मुताबिक बीसीसीबाई या राज्य संघों में तीन साल के कार्यकाल को दो बार पूरा करने वाले पदाधिकारी को तीन साल तक ‘कूलिंग आफ पीरियड’ में रहना होगा.

बीसीसीआई के नए पदाधिकारी चाहते है कि ‘कूलिंग ऑफ’ का नियम उन पर लागू हो, जिन्होंने बोर्ड या राज्य संघ में तीन-तीन साल का दो कार्यकाल पूरा किया है यानी बोर्ड और राज्य संघ के कार्यकाल को एक साथ नहीं जोड़ा जाना चाहिए. धूमल ने पीटीआई से कहा, ‘हमने उम्र की सीमा में कोई बदलाव नहीं किया है. उसे पहले की तरह रहने दिया है. कूलिंग ऑफ पीरियड के मामले में हमारा मानना यह है कि अगर किसी ने राज्य संघ में काम का अनुभव हासिल किया है, तो उस अनुभव का फायदा खेल के हित में होना चाहिए. अगर वह बीसीसीआई के लिए योगदान कर सकता है तो उसे ऐसा करना चाहिए.’

उन्होंने कहा, ‘राज्य संघ में दो कार्यकाल पूरा करने के बाद अगर किसी का कूलिंग आफ पीरियड 67 साल की उम्र में शुरू होता है तो इस अवधि के खत्म होने तक वह 70 साल का हो जाएगा और बीसीसीआई के लिए कोई योगदान नहीं कर सकेगा.’ बीसीसीआई चाहता है कि अध्यक्ष और सचिव को कूलिंग ऑफ से पहले लगातार दो कार्यकाल, जबकि कोषाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों को तीन कार्यकाल मिलने चाहिए.

गांगुली की अगुवाई में वर्तमान पदाधिकारियों ने पिछले महीने ही पदभार संभाला था, जिससे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति का 33 महीने का कार्यकाल समाप्त हो गया था. उन्होंने कहा, ‘आप ने पिछले महीने बीसीसीआई के चुनावों में देखा होगा. निर्वाचन नामावली में शामिल 38 सदस्यों में सिर्फ चार या पांच के पास इससे पूर्व किसी बैठक में शामिल होने का अनुभव था. ऐसे में किसी ने अगर राज्य संघ में अनुभव हासिल किया है तो उस अनुभव का लाभ बीसीसीआई को मिलना चाहिए. धूमल ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने पहले भी लोढ़ा समिति की कुछ सिफारिशों में छूट दी है जिसमें एक राज्य, एक वोट शामिल है. उन्होंने कहा, ‘हम एजीएम में पारित हुए सभी संशोधनों को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखेंगे. कुछ चीजों में हम व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, जिसके बारे में उन्हें अवगत कराएंगे. अगर न्यायालय हमारे संशोधनों से सहमत होता है तो हम उसे लागू करेंगे.’

धूमल से जब पूछा गया कि अगर संशोधनों को मंजूरी मिल जाती है तो क्या लोढ़ा सुधार से समझौता किया जाएगा? तो उन्होंने कहा, ‘कई सिफारिशों को सर्वोच्च न्यायालय ने खुद ही हटा दिया. वे समझ रहे थे कि एक राज्य एक वोट के संबंध में तकनीकी कठिनाइयां है. हमारे पास अधिकतर सिफारिशों को लेकर कोई समस्या नहीं है, लेकिन कुछ के साथ तकनीकी दिक्कतें हैं.’

गौरतलब है कि भारत के पहले दिन-रात्रि टेस्ट के तीसरे ही दिन समाप्त होने के बाद बंगाल क्रिकेट संघ (कैब) ने चौथे और पांचवें दिन का टिकट खरीदने वाले प्रशंसकों के पैसे लौटाने का फैसला भी किया है. बांग्लादेश के खिलाफ दूसरा टेस्ट दो दिन से कुछ अधिक समय चला और भारत ने रविवार को इसे पारी और 46 रन से जीत लिया. सीएबी की ओर से कहा गया है कि लोगों की टेस्ट क्रिकेट में दिलचस्पी वापस लाने के लिए यह कदम उठाने पर हम बीसीसीआई और उसके अध्यक्ष सौरभ गांगुली का आभार जताना चाहते हैं.

सौरव गांगुली ही वह खिलाड़ी थे, जिन्होंने अपनी कप्तानी में टीम इंडिया को लड़ना सिखाया। अब संन्यास लेने के बाद अपनी दूसरी पारी में वह बीसीसीआई का अध्यक्ष पद संभाल रहे हैं. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का नया मुखिया बनने के साथ ही दादा ने पिंक बॉल डे-नाइट टेस्ट मैच का आयोजन कर दुनिया के सामने एकबार फिर अपनी नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवाया है.
 

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