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इमरान खान कहां से चुकाएंगे 90 अरब डॉलर का कर्ज

By Republichindi desk | Publish Date: 5/15/2019 1:36:23 PM
इमरान खान कहां से चुकाएंगे 90 अरब डॉलर का कर्ज

रिपब्लिक डेस्क. पाकिस्तान की संकट से घिरी अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से आखिरकार छह अरब डॉलर का सहारा मिल गया है. आईएमएफ की शर्तें अभी तक भले ही स्पष्ट नहीं हो पाई है लेकिन अंतरराष्ट्रीय संस्था इस्लामाबाद पर राजस्व बढ़ाने समेत कई सुधार करने का दबाव जरूर डालेगी. पाकिस्तान में इमरान खान की देर से आईएमएफ का दरवाजा खटखटाने के लिए आलोचना हो रही है. इमरान खान भुगतान संकट को टालने के लिए अपने मित्र देशों चीन और सऊदी अरब से कर्ज लेते रहे लेकिन आखिरकार उन्हें आईएमएफ के पास जाना ही पड़ा. पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त पड़ी है, सब्जियों और फलों के दाम आसमान छू रहे हैं और निर्यातक संघर्ष कर रहे हैं. पिछले महीने अपने कैबिनेट में फेरबदल करते हुए इमरान खान ने अपने सहयोगी और वित्त मंत्री असद उमर को हटाकर अब्दुल हाफिज शेख को पद सौंप दिया था.

यह 1980 के बाद से 13वीं बार है जब पाकिस्तान आईएमएफ कार्यक्रम में शामिल हुआ है जिसकी अवधि तीन वर्ष की है. शेख के मुताबिक, पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार और आयात-कर्ज के भुगतान में करीब 12 अरब डॉलर का फर्क है. पाकिस्तान का कुल विदेशी कर्ज 90 अरब डॉलर का है. आईएमएफ से इस साल पाकिस्तान को 2 अरब डॉलर की राशि मिलेगी जो कर्ज को देखते हुए बहुत मामूली है. पाकिस्तान कर्ज के जाल में बुरी तरह फंसा हुआ है. पाकिस्तान के कर्ज लेने की शुरुआत 27 मार्च 1952 में हुई, जब उसने विश्व बैंक से रेलवे और विकास के लिए 27.2 मिलियन डॉलर कर्ज लिया. इसके बाद से पाकिस्तान की हर सरकार में यह सिलसिला बना रहा. आईएमएफ के मुताबिक, पाकिस्तान का कर्ज वर्तमान में जीडीपी का 70 फीसदी पहुंच चुका है जो 2008 में जीडीपी का 60 फीसदी था. पाकिस्तान आईएमएफ से 21 बार उधार ले चुका है और लगभग हर सरकार विदेशी मुद्रा भंडार बनाए रखने के लिए आईएमएफ बेलआउट पैकेज का सहारा लेती रही है ताकि भुगतान संकट को टाला जा सके. पाकिस्तान ने पिछले 6 वित्तीय वर्षों में करीब 26 अरब डॉलर का कर्ज लिया है जिसमें 7.32 अरब का ब्याज शामिल नहीं है.

पाकिस्तान ने 2013-14 वित्तीय वर्ष में 6 अरब डॉलर, 2014-15 में 5.4 अरब डॉलर और 2015-16 में 4.4 अरब डॉलर का कर्ज लिया जबकि 2016-17 में विदेशी स्रोतों से 6.5 अरब डॉलर और 2017-18 में 6 अरब डॉलर का कर्ज लिया. पाकिस्तान के वित्त मंत्री ने संसद को बताया था कि नए वित्तीय वर्ष में ही 4.5 अरब डॉलर का कर्ज ले चुका है. आईएमएफ ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि पाकिस्तान का 27 अरब डॉलर के कर्ज की अवधि दो वर्षों के भीतर पूरी होने वाली है और इस कर्ज को चुकाने में उसकी अर्थव्यवस्था डगमगा सकती है. कराची में ब्रोकरेज हाउस के प्रमुख साद बिन अहमद कहते हैं, आईएमएफ के पैकेज से विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा जो फंड की धनराशि से ज्यादा महत्वपूर्ण है. आईएमएफ कार्यक्रम में शामिल होना जरूरी था क्योंकि इससे हमें दूसरे राजस्व स्रोतों से धन जुटाने में आसानी होगी. इससे बाजार के दूसरे खिलाड़ियों को आप आश्वासन दे सकते हैं कि अब आप पाकिस्तान की मदद कर सकते हैं क्योंकि अर्थव्यवस्था अनुशासित तरीके से चलेगी. आईएमएफ की मदद कई कड़ी शर्तों के साथ आती है. अधिकारियों का कहना है कि इस्लामाबाद को पावर सेक्टर की सब्सिडी खत्म करनी होगी, राजस्व संग्रहण में तेजी लानी होगी और आतंकी संगठनों के वित्तपोषण को रोकना होगा. अहमद कहते हैं, पाकिस्तान विदेशी निवेशकों को खाद्य प्रसंस्करण, ऊर्जा और ऑटो सेक्टर में आमंत्रित कर सकता है. इन सभी उत्पादों की मांग में कमी नहीं आई है.

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