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विदेशी बीयर पर भारी पड़ रहा हिमालय के पानी से बना प्रीमियम बीयर

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 6/3/2019 11:44:07 AM
विदेशी बीयर पर भारी पड़ रहा हिमालय के पानी से बना प्रीमियम बीयर

रिपब्लिक डेस्क. भूटान के लोग खुद तो खुश रहते ही हैं अब भारतीयों को भी खुशियां बांटने लगे हैं. हैप्पीनेस इंडेक्स में आगे रहने के लिए मशहूर भूटान आजकल बीयर के लिए भारतीय कंपनियों को आकर्षित कर रहा है. यूरोप और भारत की तुलना में भूटान में बीयर उत्पादन सस्ता पड़ रहा है, साथ ही स्वाद भी बेहतरीन है. देसी बीयर निर्माता कंपनी भूटान में हिमालय के पानी से प्रीमियम बीयर बना कर अलग बाजार स्थापित कर रही हैं. अब ये यूरोपीय देशों से आयात को तरजीह नहीं देना चाहतीं.

अल्फा और कटिपतंग ने पिछले कुछ महीनों में मेड इन भूटान बीयर बेचना शुरू किया है. सिम्बा, आर्बर ब्रवरिंग कंपनी और व्हाइट रिनो जैसी कंपनियां विस्तार की संभावानाएं खोज रही हैं. इन कंपनियों को भूटान में बीयर बनाना यूरोपीय देशों तुलना में सस्ता पड़ रहा है. भारत में भी बीयर बनाने की तुलना में लागत कम है. भारत की कई बीयर कंपनियां अपने प्रॉडक्ट के प्रमुख तत्व यानी पानी के लिए भूटान में उत्पादन की संभावनाएं तलाश रही हैं. कंपनियों को वहां के प्राकृतिक झरने के पानी से अपने ब्रांड को दूसरों से अलग बनाने में मदद मिलती है. इससे उनके प्रॉडक्ट को अच्छी कीमत भी मिलती है.

कारोबार शुरू करना है आसान

क्राफ्ट बीयर के कॉन्ट्रैक्ट ब्रुइंग और बॉटलिंग इंडियन मार्केट के बजाय भूटान में लाइसेंस लेना ज्यादा पसंद कर रहे हैं. अल्फा ब्रैंड की मालिक पंजाब की मैडमैक्स ब्रुइंग कंपनी के अभिषेक दहिया का कहना है, ‘भारत में बीयर फैक्टरी लगाने में काफी परेशानी होती है. इसका लाइसेंस काफी महंगा होता है. मंजूरियों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने के अलावा अधिकारियों से भी डील करनी पड़ती है. वहीं, भूटान में सारी प्रक्रिया चंद घंटों में ही पूरी हो जाती है. अगर यूरोप और ब्रिटेन से तुलना करें तो वहां से शिपमेंट्स में दो महीने लग जाते हैं. भूटान में कारोबार शुरू करने का मतलब है कि यह समय भी बचेगा.

स्वाद भी बढ़िया 

भूटान के किंजोर ब्रुअरी के साथ बेहतर तालमेल से दहिया का हौसला काफी बढ़ गया है. उन्हें भरोसा है कि वह जून तक पोर्टफोलियो में एक और वेरिएंट जोड़ने के साथ अगस्त तक हरियाणा, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और उत्तर-पूर्व में डिस्ट्रीब्यूशन का विस्तार कर लेंगे. भूटानी बीयर का टेस्ट भी बेहतर होता है. चूंकि, इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, इसलिए मैन्युफैक्चरर्स अपने प्रॉडक्ट्स को दूसरी कंपनियों से अलग बनाने के लिए भूटान में उत्पादन शुरू कर रहे हैं. बॉटल्ड क्राफ्ट बीयर ब्रांड कटी पतंग ने 7 महीने पहले दिल्ली में अपना कारोबार शुरू किया था, वह हंगसो में सेर भूम ब्रुअरी में एंबर एल बना रही है. इसकी अगले दो महीनों में भूटान के बाद मुंबई और बेंगलुरु में डिस्ट्रीब्यूशन का विस्तार करने की योजना है.

हिमालय के झरनों की मार्केटिंग

भारत का क्राफ्ट बीयर उद्योग समग्र घरेलू बीयर बाजार का महज 2-3% है. यह ज्यादातर जर्मनी और बेल्जियम की खोज पर निर्भर है. यहां गेहूं से बनी विशेष रूप से हेफेइजन और विटबियर मशहूर है. लेकिन हिमालय के प्राकृतिक झरने का पानी, उनके ब्रांड को अलग करने और प्रीमियम मूल्य देने का फायदा दे रहा है. साथ ही  क्राफ्ट बीयर से लेकर लाइसेंस की खरीद तक में भूटान की छूट इन कंपनियों को लुभा रही है.

हिमालय के झरने का पानी

भूटानी बीयर बाजार में स्वाद के मामले में भी बेहतर है. इसलिए यहां प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है.  बोतलबंद क्राफ्ट बीयर ब्रांड कटि पतंग, जिसने सात महीने पहले दिल्ली में अपनी शुरुआत की थी, अब अगले दो महीनों में मुंबई और बेंगलुरु में वितरण का विस्तार करने की योजना है. व्हिस्की निर्माताओं की तरह स्कॉटिश हाइलैंड्स व बीयर ब्रुअर्स अब भूटान की ओर रूख कर रहे हैं. गौरतलब है कि भारत की तुलना में भूटान में अपनी प्राकृतिक स्थिति में पानी उच्च गुणवत्ता वाला है. बीयर के स्वाद को प्रभावित करने में पानी अहम घटक है. कटि पतंग के कोफाउंडर शांतनु उपाध्याय ने यूएस क्राफ्ट बीयर के अग्रणी जिम कोच के साथ मिलकर अपनी व्यवसाय योजना तैयार की है. बोस्टन बीयर कंपनी के मुताबिक वे भारतीय पानी के बजाय समुद्र तल से 10,334 फीट ऊपर स्थित भूटान में इस शराब की भठ्ठी से झरने का पानी प्राप्त करते हैं, जिसे आरओ उपचार और अलग से खनिजों की जरूरत नहीं है.
 

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