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पीएम पद की रेस में मायावती और ममता बनर्जी में कौन आगे

By Republichindi desk | Publish Date: 5/14/2019 1:36:25 PM
पीएम पद की रेस में मायावती और ममता बनर्जी में कौन आगे

रिपब्लिक डेस्क. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के अलावा करीब आधा दर्जन नेता पीएम पद की रेस में शामिल हैं. इन आधा दर्जन नेताओं में दो गंभीर दावेदार हैं मायावती और ममता बनर्जी. हालांकि यह दोनों ही लोकसभा चुनाव नही लड़ रही हैं. बीएसपी सुप्रीमो मायावती साफ कह चुकी हैं कि अगर उनको प्रधानमंत्री बनने का मौका मिला तो वह उत्तर प्रदेश की अंबेडकरनगर सीट से चुनाव लड़ेंगी. वैसे इस पद की एक और दावेदार बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी, मायावती की इस महात्वाकांक्षा से ज्यादा खुश नहीं हो सकती हैं.

ममता बनर्जी भले ही गैर कांग्रेस और गैर बीजेपी का नारा देकर बाकी दलों का नेता बनने की कोशिश कर रही हों, लेकिन अब मायावती भी सधे पांव समीकरणों को साधने में जुटी हुई हैं. दूसरी तरफ खबर यह भी है कि पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी, बीएसपी सुप्रीमो मायावती और एसपी प्रमुख अखिलेश यादव वोटिंग खत्म होने से पहले दिल्ली में होने वाली मीटिंग को टाल सकते हैं. इस मीटिंग का नेतृत्व कांग्रेस द्वारा किया जाना है. सूत्रों का कहना है, आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू बीते हफ्ते बंगाल गए थे और उन्होंने ममता बनर्जी से मुलाकात की थी. लेकिन जब उन्होंने मीटिंग के बारे में बात की तो ममता बनर्जी ने उनसे कहा, जब तक 23 मई को नतीजे नहीं आ जाते तब तक मीटिंग की कोई जरूरत नहीं है. मायावती की तरफ से भी नकारात्मक जवाब ही मिला.

पीएम पद की रेस में अगर मायावती और ममता बनर्जी की तुलना करें तो मायावती के लिए समर्थन बढ़ रहा है. बीएसपी ने विधानसभा चुनाव से पहले ही कर्नाटक में एचडी देवगौड़ा की पार्टी जनता दल सेक्युलर के साथ गठबंधन किया था और फायदा यह रहा कि उसके कोर वोटरों ने जेडीएस का भरपूर साथ दिया साथ ही बीएसपी एक सीट निकालने  में कामयाब हो गई. कर्नाटक का सीएम बनते ही कुमारस्वामी ने कहा हालात बनने पर वह पीएम पद के लिए मायावती का समर्थन करेंगे. इसके बाद हरियाणा के एक और कद्दावर नेता अभय चौटाला ने भी मायावती को समर्थन की बात कही. अगर एनडीए-यूपीए को बहुमत के आसपास सीटें नहीं मिलती है तो कांग्रेस, अन्य दल जो यूपीए में साथ नही हैं उनको साथ लेकर देश का पहला दलित पीएम बनाने के लिए मायावती को समर्थन दे सकती है.

कांग्रेस के पास दलितों वोटरों का दिल जीतने का भी मौका मिल जाएगा. वैसे भी कांग्रेस नेता सीना ठोक कहते हैं कि उनकी पार्टी ने ही सबसे पहले किसी दलित को कमान सौंपी थी. पहले दलित राष्ट्रपति केआर नारायणन बनाया, फिर पहली दलित महिला स्पीकर मीरा कुमार को बनाया. सुशील कुमार शिंदे देश के पहले दलित गृहमंत्री बने और कांग्रेस के कार्यकाल में ही देश को पहला दलित प्रधान न्यायाधीश जस्टिस केजी बालकृष्णन मिले. वैसे भी मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस ने सरकार जरूर बनाई है लेकिन वह बीएसपी और अन्य दलों को समर्थन से ही सत्ता में टिकी हुई है. अगर हालात बनने के बाद भी कांग्रेस मायावती का समर्थन नहीं करती है तो बीएसपी सुप्रीमो इन दोनों सरकारों को अस्थिर करने में ज्यादा देर नहीं लगाएंगी.

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