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शिवानंद तिवारी ने लिया राजनीति से संन्यास, राजद को उठाना पड़ सकता है बड़ा नुकसान

By Republichindi desk | Publish Date: 10/23/2019 2:21:28 PM
शिवानंद तिवारी ने लिया राजनीति से संन्यास, राजद को उठाना पड़ सकता है बड़ा नुकसान

न्यूज डेस्कः राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राष्ट्रीय उपाध्यनक्ष शिवानंद तिवारी ने राजनीति से सन्यास लेने का ऐलान किया है. उन्होंने पार्टी के राजनीतिक कार्यों से छुट्टी लेने की बात कही हैं. गत मंगवार को उन्होंने एक प्रेस नोट जारी कर यह बात कही .कयास लगाया जा रहा है उन्होंने पार्टी के उपाध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया है. इस मामले में राजद की ओर से अबतक किसी प्रकार की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है. शिवानंद तिवारी राजद में सबसे वरिष्ठ और लालू यादव के करीबी नेताओं में एक हैं. फिलहाल बिहार में चुनाव सर पर है. ऐसे में ये कयास लगाये जा रहे हैं कि इस वक्त शिवानंद का राजनीति से सन्यास लेना राजद को महंगा पड़ सकता है.

राजद वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी अपने बयान में कहा है कि मैं अब थकान अनुभव कर रहा हूं. शरीर से ज़्यादा मन की थकान है. संस्मरण लिखना चाहता था, लेकिन वह भी नहीं कर पा रहा हूं. इसलिए जो कर रहा हूं, उससे छुट्टी पाना चाहता हूं. उन्होंने अपने बयान में आगे आगे लिखा है कि संस्मरण लिखने का प्रयास करूंगा. लिख ही दूंगा, ऐसा भरोसा भी नहीं है, लेकिन प्रयास करूंगा. उन्होंने आगे बड़े निर्णय की घोषणा करते हुए कहा कि राजद की ओर से जिस भूमिका का निर्वहन अब तक मैं कर रहा था, उससे छुट्टी ले रहा हूं.

पार्टी में खुद की उपेक्षा से दुखी थे शिवानंद

सूत्रों की माने तो शिवानंद तिवारी को लंबे समय से पार्टी की प्रमुख गतिविधियों से न सिर्फ दूर रखा जाता था, बल्कि उन्हें पार्टी की बैठकों की जानकारी तक नहीं दी जाती थी. इसके अलावा अभी हो रहे उपचुनाव में उन्हें तेजस्वी ने चुनाव प्रचार करने का मौका तक नहीं दिया, जबकि स्टार प्रचारकों की लिस्ट में बाबा बाकियों से ऊपर की श्रेणी में थे. बावजूद इसके शिवानन्द तिवारी ने खुद से जाकर दरौंदा विधानसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार किया, लेकिन उनके साथ पार्टी का एक कार्यकर्ता तक शामिल नहीं हुआ. हालांकि वे अपना दुख खुलकर प्रकट नहीं किए हैं. पार्टी में उनका रुतवा कम हो गया है.

राजद नेतृत्व की कार्यशैली पर ही उन्होंने कई बार सवाल उठाया. उन्होंने विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव को जनता के बीच जाने की सलाह दिये थे. लिहाजा पार्टी में उन्हों कोइ पसंद नहीं कर रहा था. हाल के दिनों में राजद की गतिविधियों से अलग-थलग ही चल रहे थे. लेकिन, मंगलवार को जारी उनके बयान ने उनकी पीड़ा को उजागर कर रहा है. इधर, राजद की जिम्मेठवारियों से शिवानंद तिवारी के छुट्टी लेने को लेकर पार्टी की ओर से कोई बयान नहीं आया है. लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि अब विरोधी पार्टियां चुटकी लेने में पीछे नहीं रहेंगी.

कौन हैं शिवानंद तिवारी

बता दें कि अपनों के बीच बाबा के नाम से मशहूर शिवानंद तिवारी उन गिने-चुने राजनेताओं में से हैं, जिन्हें राजनीति विरासत में मिली है.वे समाजवादी नेता स्व. रामानंद तिवारी के पुत्र हैं. बताते हैं शिवानंद तिवारी का रानजीतिक 1952 से शुरु हुआ था.

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