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करोड़ों में पहुंचा आरजेडी का पार्टी फंड, सदस्यों की संख्या भी हुई करोड़ों

By लोकनाथ तिवारी | Publish Date: 10/18/2019 5:43:58 PM
करोड़ों में पहुंचा आरजेडी का पार्टी फंड, सदस्यों की संख्या भी हुई करोड़ों

रिपब्लिक हिंदी डेस्क: विधायकों की संख्या के हिसाब से बिहार में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद राजद का खजाना पिछले कुछ समय से खाली था, लेकिन अब राजद करोड़पति बन गया. उसके खजाने में पौने पांच करोड़ रुपये आ गये हैं. यह मोटी रकम सदस्यता अभियान के जरिए आई है. फाइनल रिपोर्ट आने के बाद यह राशि बढ़ भी सकती है. साथ ही आरजेडी के सदस्यों और कार्यकर्ताओं की संख्या भी करोड़ का आंकड़ा पार कर गयी है.

गौरतलब है कि आरजेडी की हालत इतनी पतली हो गई थी कि बीते पांच जुलाई को पार्टी के स्थापना दिवस में राबड़ी देवी को खुले मंच से यह कहना पड़ा था कि चुनाव प्रचार में खर्च के कारण पार्टी का खजाना खाली हो चुका है. गरीब-गुरबों की पार्टी कही जाने वाली लालू प्रसाद यादव की आरजेडी की हालत लोकसभा चुनाव के बाद से ही खराब है. उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव के नेतृत्व में चलाए गए अभियान का इतना असर रहा कि बीते कुछ वर्षों से खाली खजाना मालामाल हो गया है. बताया जा रहा है कि वर्ष 1997 में पार्टी गठन के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि पार्टी के सदस्यों की संख्या करोड़ में पहुंच गई है और पार्टी के खजाने में अच्छी खासी रकम भी आ गई है.

आरजेडी चुनाव प्रचार अभियान से जुड़े नेता तनवीर हसन की मानें तो वर्ष 1997 में आरजेडी सदस्यों की संख्या 72 लाख थी जो आज एक करोड़ तक जा पहुंची है. पार्टी सूत्रों से मिले एक आंकड़े के मुताबिक अब तक आरजेडी ऑफलाइन सदस्यों की संख्या एक करोड़ के आसपास पहुंच गई है. इसमें अभी कुछ और इजाफा होने की संभावना है.

सदस्यता अभियान के दौरान बिहार में करीब 80 लाख और दूसरे प्रदेशों में करीब 15 लाख लोग राजद के सदस्य बने. पांच रुपये प्रति सदस्य के हिसाब से सदस्यता शुल्क मद में राजद के खाते में पौने पांच करोड़ रुपये से ज्यादा जुटा लिए. विधायकों से पार्टी के नियमित खर्च के लिए प्रत्येक महीने चार से पांच हजार रुपये लिये जाते हैं.

राजद के अभी 79 विधायक, आठ विधान पार्षद और चार सांसद (राज्यसभा) हैं. इस तरह पार्टी के खाते में सालाना लगभग 40 लाख रुपये आ जाते हैं. कुछ पूर्व सांसद और पूर्व विधायक भी पार्टी फंड में जब-तब कुछ पैसे देते रहते हैं.

राजद की वेबसाइट पर चंदे के पैसे की कोई जानकारी नहीं दी गई है. एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के बिहार प्रमुख राजीव कुमार के मुताबिक राजनीतिक दल चंदे के पैसे को सार्वजनिक करने से बचते हैं, जबकि हकीकत यह है कि पिछले दो वर्षों में राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में 150 परसेंट से ज्यादा की वृद्धि हुई है.

बता दें कि लोकसभा चुनाव के बाद राजद के स्थापना दिवस पर पांच जुलाई को राजद कार्यालय में आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए राबड़ी ने अपने दल के नेताओं से पैसा निकालने की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि पार्टी के कोष में जो पैसे थे, वे सब चुनाव में खर्च हो गए. कोषाध्यक्ष राकेश कुमार के मुताबिक, सदस्यता से आने वाले पैसे का हिसाब 20 मार्च के बाद होगा.
 

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