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बिहार: भाजपा विरोधी राजनीति के प्रमुख केंद्र बने तेजस्वी, दिखा रहे परिपक्वता

By Republichindi desk | Publish Date: 1/9/2019 12:45:24 PM
बिहार: भाजपा विरोधी राजनीति के प्रमुख केंद्र बने तेजस्वी, दिखा रहे परिपक्वता

पटना: राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार नजर आ रहे हैं. भारतीय जनता पार्टी विरोधी राजनीति के प्रमुख केंद्र तेजस्वी यादव बन चुके हैं. राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की अनुपस्थिति में तेजस्वी यादव ने जिस तरह अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय कराया है, उससे उनके समर्थक तो गदगद हैं ही, विरोधी भी कायल हैं.

विपक्ष में आते ही तेजस्वी को मिली धार

2015 के विधानसभा चुनावों से पहले बिहार में महागठबंधन बना था. उस वक्त महागठबंधन के शिल्पकार तेजस्वी यादव के पिता लालू प्रसाद यादव और मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार थे. नीतीश कुमार 2013 में नरेंद्र मोदी को पीएम उम्मीदवार बनाए जाने के विरोध में भारतीय जनता पार्टी से अलग हो चुके थे. 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद जनता दल यू काफी कमजोर नजर आ रही थी. मुख्यमंत्री भले नीतीश कुमार थे लेकिन सरकार राजद के परोक्ष समर्थन से चल रही थी. इसी दौरान उपचुनाव में राजद और जदयू ने आपस में सीटें बांटकर चुनाव लड़ा और काफी बेहतर परिणाम आया था. 2015 के विधानसभा चुनाव से पहले महागठबंधन की बात चली और महागठबंधन अस्तित्व में आया था. राजद कांग्रेस और जदयू ने साझा चुनाव प्रचार अभियान चलाया और ऐतिहासिक सफलता मिली थी. हालांकि सरकार गठन के 21 महीने बाद ही महागठबंधन की सरकार गिर गई और भ्रष्टाचार के सवाल पर नीतीश कुमार राजद से अलग हो गए थे. नीतीश कुमार के जाने के बाद तेजस्वी यादव ने आक्रामक तेवर अपनाया था. उप मुख्यमंत्री रहते तेजस्वी यादव में वह निखार नहीं आ रहा था, जितना निखार उनके नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद आया है. नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद तेजस्वी लगातार परिपक्व होते नजर आ रहे हैं.

महागठबंधन बनाने में निभा रहे हैं बड़ी भूमिका

तेजस्वी यादव ने अपनी नेतृत्व क्षमता का एहसास तो कराया ही है, साथ ही महागठबंधन बनाने में भी बहुत बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. कांग्रेस, रालोसपा, सन ऑफ मल्लाह को एक साथ लाकर तेजस्वी ने मजबूत महागठबंधन बना लिया है. इसके अलावा उन्होंने उत्तर प्रदेश में भी पहल करने की बात कही है. तेजस्वी यादव ने कुछ दिनों पहले कहा था कि उत्तर प्रदेश में भी महागठबंधन आकार ले सके. इसके लिए वे अखिलेश यादव और मायावती से भी बात करेंगे. जाहिर है जिस तरह उन्होंने बिहार में नेतृत्व क्षमता का एहसास कराया है, उससे स्पष्ट है कि उनकी भूमिका को किसी सूरत में कमतर नहीं आंका जा सकता है.

 

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