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44 सालों में पहली बार लालू हैं चुनाव से दूर, ऐसे कर रहे भरपाई

By Republichindi desk | Publish Date: 4/11/2019 6:13:25 PM
44 सालों में पहली बार लालू हैं चुनाव से दूर, ऐसे कर रहे भरपाई

रिपब्लिक डेस्क. पिछले 44 सालों में पहली बार यह हो रहा है कि लोकसभा चुनाव से राजद सुप्रीमो व बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव दूर हैं. लालू यादव भले ही जेल में हैं, मगर सोशल मीडिया के जरिये उनका लोगों से नाता बना हुआ है. वैसे पुलिस कस्टडी या जेल में कोई मोबाइल फोन नहीं रख सकता, मगर बताया जाता है कि लालू यादव का ट्विटर हैंडल बाहर से कोई भरोसेमंद व्यक्ति संचालित करता है. जो उनके विचार ट्वीट के जरिए लोगों तक पहुंचाता है.

इस बार लालू यादव ने बिना किसी का नाम लिए एक ट्वीट कर लोगों को अटकलें लगाने पर मजबूर कर दिया. उन्होंने कहा- वह दो मुंहा सांप है. कब किधर जाएगा, किसी को पता है. कोई लेगा उसकी गारंटी. लेगा कोई. माना जाता है कि इस ट्वीट के जरिए उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पाला बदलने पर निशाना साधा है.

दरअसल लालू यादव की पार्टी राजद और नीतीश की पार्टी जदयू ने विधानसभा चुनाव मिलकर लड़ा था और गठबंधन सरकार बनायी थी, मगर बाद में नीतीश गठबंधन छोड़कर बीजेपी के साथ चले आए.चारा घोटाले में जेल में बंद राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की हाल में एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट ने जमानत खारिज कर दी है. लालू यादव स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कोर्ट से जमानत मांगी थी, लेकिन सीबीआई ने उनकी जमानत याचिका का विरोध किया था. सीबीआई ने कहा था कि लालू यादव लोकसभा चुनाव के लिए जमानत मांग रहे हैं. जमानत अर्जी खारिज होने के बाद लालू यादव ने ट्वीट कर कहा कि 44 वर्षों में पहला चुनाव है, जिसमें आपके बीच नहीं हूं.

चुनावी उत्सव में आप सबों के दर्शन नहीं होने का अफ़सोस है. आपकी कमी खली रही है इसलिए जेल से ही आप सबों के नाम पत्र लिखा है. आशा है आप इसे पढ़ियेगा एवं लोकतंत्र और संविधान को बचाइयेगा. जय हिंद, जय भारत. लालू यादव ने अपने इस ट्वीट के साथ एक पत्र को साझा किया है. श्री यादव ने लिखा है, 'इस वक्त जब बिहार एक नई गाथा लिखने जा रहा है. लोकतंत्र का उत्सव चल रहा है. यहां रांची के अस्पताल में अकेले बैठकर मैं सोच रहा हूं कि क्या विध्वंसकारी शक्तियां मुझे इस तरह कैद कराके बिहार में पिर किसी षड्यंत्र की पठकथा लिखने में सफल हो पायेगी. मेरे रहते बिहारवासियों के साथ मैं फिर से धोखा नहीं होने दूंगा.

मैं कैद हूं लेकिन मेरे विचार नहीं. अपने विचारों को आपसे साझा कर रहा हूं, क्योंकि एक दूसरे से विचारों को साझा करके ही हम इन बांटने वाली ताकतो से लड़ सकते हैं. उन्होंने आगे लिखा, 'इस बार चुनाव में सबकुछ दांव पर है. इस बार का चुनाव पहले जैसा नहीं है. देश, समाज, लालू यानी आपका बराबरी से सिर उठाकर चलने का जज्बा देने वाला और आपके हक और इज्जत और गरिमा सब दांव पर है. लड़ाई आर-पार की है. मेरे गले में सरकार और चालबाजों का फंदा फंसा हुआ है. उम्र के साथ शरीर साथ नहीं दे रहा है, पर आन और आबरू की लड़ाई में लालू की ललकार हमेशा रहेगी.

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