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जदयू: नीरज ने जिसे निशाने पर लिया वह निपट गया, क्या अब आएगी पीके की बारी

By Republichindi desk | Publish Date: 3/14/2019 6:57:57 PM
जदयू: नीरज ने जिसे निशाने पर लिया वह निपट गया, क्या अब आएगी पीके की बारी

पटना: जनता दल यूनाइटेड में नेताओं का निपटना और निपटाना तो चलता ही रहता है लेकिन बात यहां उस प्रवक्ता की हो रही है, जिसने जब भी किसी को निशाने पर लिया वह निपट ही गया. बीते कुछ सालों में जनता दल यूनाइटेड के मुखर प्रवक्ता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी नीरज कुमार ने दल के किसी भी नेता को जब भी निशाने पर लिया है, पार्टी से उसकी विदाई ही हुई है. निपटने निपटाने के सूत्रधार के तौर पर नीरज कुमार की चर्चा हो रही है तो अब पूछा जा रहा है कि क्या अब जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर के निपटने की तैयारी है.

मांझी के खिलाफ किया था पहला विद्रोह

बात उन दिनों की है जब जीतन राम मांझी बिहार के मुख्यमंत्री हुआ करते थे. 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद नीतीश कुमार ने पार्टी की शर्मनाक हार की जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. मान मनौव्वल का दौर चला लेकिन नीतीश को मनाया नहीं जा सका. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक में उन्होंने अपना निर्णय सुना दिया कि जो फैसला लेंगे वह पार्टी के सभी नेताओं को मानना होगा. बैठक भंग कर दी गई थी. अगले दिन नीतीश कुमार ने जीतन राम मांझी का नाम लिया और कहा कि मांझी ही सीएम होंगे. जीतन राम मांझी मुख्यमंत्री तो बन गए लेकिन बाद में बयानों और फैसलों से सुर्खियां बटोरने लगे. उनके में बयानों और फैसलों से पार्टी और सरकार की भद्द पिटने लगी. पूरे राज्य में मांझी के बयानों का मज़ाक उड़ने लगा. जगहंसाई होती देख नीरज कुमार ने ही सबसे पहले मोर्चा खोला था. पार्टी का कोई नेता जब मांझी के खिलाफ बोल नहीं पा रहा था, तब जदयू प्रवक्ता और विधान परिषद नीरज कुमार ने उनके खिलाफ मोर्चा खोलते हुए कहा था कि सुशासन के एजेंडे से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी. नीरज के बाद दूसरे नेताओं में भी खुसर-फुसर शुरू हुई लेकिन पहला मोर्चा नीरज ने ही खोला था. नीरज द्वारा मोर्चा खोलने के दो महीने के अंदर ही मांझी निपट गए और फिर उनको जदयू से बाहर जाकर अलग पार्टी बनानी पड़ी थी.

अनंत सिंह के खिलाफ भी खोल दिया था मोर्चा

मोकामा के निर्दलीय विधायक अनंत सिंह के खिलाफ मोर्चा नीरज ने ही खोला था. अनंत सिंह जब जदयू में थे तब भी नीरज कुमार उन पर टीका टिप्पणी किया करते थे. हालांकि उनकी टिप्पणियों को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा था लेकिन बीते दिनों मोकामा के शिवनार गांव में हुए एक कार्यक्रम के बाद अनंत सिंह और जदयू की दूरियां बढ़ गई. अनंत सिंह निर्दलीय विधायक थे लेकिन जल संसाधन मंत्री ललन सिंह और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनकी करीबियां जगजाहिर थी. माना जा रहा था कि लोकसभा चुनावों में वे जदयू प्रत्याशी ललन सिंह का साथ देंगे. मोकामा प्रखंड के शिवनार वाले कार्यक्रम के बाद नीरज कुमार ने बिना मतलब ही सही लेकिन अनंत सिंह के खिलाफ बयान देना शुरू कर दिया था. अनंत सिंह ने उनके बयानों का कोई नोटिस नहीं लिया था लेकिन अनंत सिंह नाराज जरूर हुए थे. अनंत सिंह को उम्मीद थी कि ललन सिंह या मुख्यमंत्री जरूर हस्तक्षेप करेंगे लेकिन मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप नहीं किया. नाराज अनंत सिंह जल संसाधन मंत्री ललन सिंह के खिलाफ ही मुंगेर में ताल ठोक रहे हैं.

महागठबंधन की सरकार रहते लालू कुनबे पर किया था पहला हमला

इतना ही नहीं बिहार में महागठबंधन की सरकार थी और राजद विधायकों के बदौलत नीतीश कुमार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान थे, तब भी लालू कुनबे के खिलाफ पहला मोर्चा नीरज कुमार ने ही खोला था. आईआरसीटीसी होटल टेंडर आवंटन मामले तथा अन्य मामलों को लेकर जदयू के इस मुखर प्रवक्ता ने ही पहली बार मोर्चा खोला था. इसके बाद ही यह कयास लगने लगा था कि अब महागठबंधन की सरकार के विदा होने का समय आ गया है. कुछ दिनों की खींचतान के बाद अंततः हुआ भी यही था.

अब सबकी निगाहें टिकी हैं पीके पर

जीतन राम मांझी, अनंत सिंह, शरद यादव जैसे पार्टी के प्रमुख नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले नीरज कुमार ने अब पीके के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. प्रशांत किशोर के कुछ बयानों से भड़के नीरज ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया. नीरज ने साफ साफ चेतावनी भी दी. प्रशांत किशोर पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और नीरज पार्टी की प्रदेश इकाई के प्रवक्ता. इसके बाद भी नीरज द्वारा बयान देना यह संकेत है कि पीके अब यदि सुधार नहीं करेंगे तो पार्टी में उनके दिन गिने चुने ही हुए हैं.

 

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