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सांप्रदायिक सौहार्द की अनोखी मिसाल, सावन की अंतिम सोमवारी पर मुसलमान नहीं देंगे कुर्बानी

By Republichindi desk | Publish Date: 8/12/2019 9:36:59 AM
सांप्रदायिक सौहार्द की अनोखी मिसाल, सावन की अंतिम सोमवारी पर मुसलमान नहीं देंगे कुर्बानी

पटना: सांप्रदायिक सद्भाव और सौहार्द की एक अनूठी मिसाल सामने आई है. सावन की अंतिम सोमवारी के कारण कई मुस्लिम परिवारों ने हिंदू मुस्लिम प्रेम का परिचय देते हुए ईद-उल-अजहा के मौके पर कुर्बानी नहीं देने का फैसला किया है. दरअसल इस बार सावन की अंतिम सोमवारी और ईद-उल-अजहा के एक ही दिन होने से मुसलमान परिवारों ने यह निर्णय लिया है.

बाबा गरीब नाथ मंदिर के पास रहने वाले मुसलमानों का सामूहिक फैसला
 
मुजफ्फरपुर का बाबा गरीब नाथ मंदिर काफी प्रसिद्ध है. बाबा गरीब नाथ मंदिर के आसपास काफी संख्या में मुस्लिम परिवार रहते हैं. बाबा गरीब नाथ मंदिर के पास ही छाता बाजार मस्जिद है. उसी छाता बाजार मस्जिद के इमाम मौलाना सईदुज्जमां, मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष दिलशाद अहमद, सचिव हाजी मोहम्मद आजाद ने मुस्लिम समाज के लोगों के साथ बैठक की. बैठक में सामूहिक रूप से निर्णय लिया गया कि सावन की अंतिम सोमवारी होने के कारण वे लोग सोमवार को कुर्बानी नहीं देंगे और ईद-उल-अजहा की कुर्बानी मंगलवार को दी जाएगी. दरअसल गरीब नाथ मंदिर को लेकर इलाके के लोगों में काफी श्रद्धा और विश्वास है. हिंदू धर्म के लोगों की श्रद्धा और विश्वास को देखते हुए मुसलमान भाइयों ने गरीब नाथ मंदिर के आसपास रहने वाले परिवारों से कुर्बानी न देने की अपील की. बाबा गरीब नाथ मंदिर के आसपास शिव भक्तों की भीड़ के कारण मुस्लिम समाज के लोगों ने यह फैसला किया.
 
सोमवार के बजाय मंगलवार को होगी कुर्बानी
 
छाता बाजार मस्जिद कमेटी के सचिव मोहम्मद आजाद तथा इमाम मोहम्मद सईदुज्जमाँ ने बताया कि सामूहिक रूप से यह निर्णय लिया गया है कि मंदिर के समीप के मोहल्लों में किसी प्रकार की कोई कुर्बानी नहीं होगी और सोमवार को होने वाली कुर्बानी को एक दिन के लिए टालकर मंगलवार को कुर्बानी की रस्म अदा की जाएगी. मुस्लिम समाज के लोगों का तर्क है कि कुर्बानी अल्लाह को खुश करने के लिए दी जाती है न कि अल्लाह के बंदों की असुविधा के लिए.

जिला प्रशासन ने किया फैसले का स्वागत
 
मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन ने इस फैसले का स्वागत किया है. मुजफ्फरपुर के डीएम आलोक रंजन घोष ने बताया कि जिला प्रशासन की इस फैसले में कोई भूमिका नहीं है लेकिन प्रशासन को इसकी जानकारी दी गई है. खुद डीएम ने बताया कि यह निश्चित तौर पर एक अच्छी पहल है. वार्ड पार्षद कमलेश्वर प्रसाद की पहल पर मुसलमान समाज के लोगों ने यह अनूठा फैसला लिया है.

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