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महागठबंधन में सीटों का बंटवारा तय, जल्द होगी घोषणा, राबड़ी बांटेंगी सिंबल

By Republichindi desk | Publish Date: 3/9/2019 9:41:45 AM
महागठबंधन में सीटों का बंटवारा तय, जल्द होगी घोषणा, राबड़ी बांटेंगी सिंबल

पटना: लोकसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन में सीटों का बंटवारा बहुत हद तक तय हो गया है. राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने महागठबंधन के घटक दलों से अंतिम दौर की बातचीत कर ली है. माना जा रहा है कि तीन से चार दिन के अंदर महागठबंधन सीटों की घोषणा कर देगा.

बड़े भाई की भूमिका में रहेगा राजद
 
राष्ट्रीय जनता दल ही महागठबंधन में बड़े भाई की भूमिका में रहेगा. कांग्रेस जितनी सीटों पर दावेदारी जता रही है, उतनी सीटें किसी सूरत में मिलना संभव नहीं है. कांग्रेस जितनी सीटों की मांग कर रही है, यदि उन मांगो को माना जाए तो राष्ट्रीय जनता दल के लिए लड़ने लायक सीटें भी बचने वाली नहीं हैं. जाहिर तौर पर राष्ट्रीय जनता दल अपने मजबूत आधार वोट बैंक के साथ चुनाव में जाएगा. हाल के मुद्दों पर जिस तरह राजद ने टफ स्टैंड अपनाया है, उससे कांग्रेस के आधार वोट बैंक के राजद प्रत्याशियों के साथ नहीं रहने की पूरी संभावना है. सवर्ण आरक्षण और 13 पॉइंट रोस्टर के मुद्दे पर राष्ट्रीय जनता दल ने काफी टफ स्टैंड अपनाया था. महागठबंधन के घटक दलों राजद, कांग्रेस, उपेंद्र कुशवाहा की रालोसपा, जीतन राम मांझी की हम, मुकेश साहनी की वीआईपी के बीच सीटों का बंटवारा होना है. कांग्रेस यदि अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की जिद नहीं छोड़ेगी तो राष्ट्रीय जनता दल उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी, जीतन राम मांझी की हम पार्टी और मुकेश साहनी की वीआईपी के साथ भी चुनाव में जा सकता है.
 
मुकेश साहनी उभरे हैं नए वोट बैंक नेता के तौर पर
 
हाल के दिनों में मुकेश साहनी बिहार में एक मजबूत वोट बैंक वाले नेता के तौर पर उभरे हैं. मल्लाह और साहनी समाज फिलहाल सन ऑफ मल्लाह मुकेश साहनी के साथ दिख रहा है. रामविलास पासवान को जिस तरह पासवान समुदाय के वोटरों पर मजबूत पकड़ के लिए जाना जाता है, ठीक वही स्थिति में मुकेश साहनी पहुंच चुके हैं. पूरे बिहार में मुकेश साहनी एक मजबूत फैक्टर बन कर उभरे हैं और माना जा रहा है कि मुकेश साहनी के पास वोट ट्रांसफर करने की क्षमता है. उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के साथ फिलहाल वैसी स्थिति दिख नहीं रही है. 2015 के विधानसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा अपने समुदाय के वोटरों का वोट एनडीए में ट्रांसफर कराने में नाकाम रहे थे. यही कारण है कि कुशवाहा समाज का अधिक मत होने के बावजूद एनडीए को वह सफलता नहीं मिल पाई थी. जीतन राम मांझी के साथ भी महादलित समुदाय बहुत हद तक एकजुट दिख रहा है. हालांकि इस समुदाय में अभी भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पकड़ है क्योंकि नीतीश कुमार की सरकार ने महादलितों के लिए जितनी योजनाएं चलाई हैं, उसका असर इस तबके के लोगों पर दिखता है.
 
एनडीए में हो चुका है सीट शेयरिंग पर फैसला
 
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में सीट शेयरिंग पर फैसला किया जा चुका है. बिहार में भारतीय जनता पार्टी और जनता दल यूनाइटेड 17-17 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे. छह सीटें लोक जनशक्ति पार्टी के लिए छोड़ दी गई है. रामविलास पासवान को इस बार एनडीए द्वारा राज्यसभा में भेजा जाएगा.
 

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