20 अगस्त 2018, सोमवार | समय 11:56:08 Hrs
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 कोलकाता सेंट्रल डेस्क: धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा है कि भारत को नालंदा परंपरा को पुनर्जीवित करने की जरूरत है. उन्होने कहा कि भारत ने नालंदा परंपरा खो दी है. तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने प्राचीन भारतीय ज्ञान को पुनर्जीवित करने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की और उन्होने ज़ोर देकर कहा कि आधुनिक भारत को इस प्राचीन ज्ञान की आवश्यकता है और इसलिए, इसे पुनर्जीवित किया जाना चाहिए.

ज्ञान की नालंदा परंपरा बेहद जरूरी 

दलाई लामा ने कहा कि 7 वीं शताब्दी में एक तिब्बती सम्राट ने बौद्ध धर्म की नालंदा परंपरा को तर्क और तार्किक निष्कर्ष के आधार पर पेश किया और संस्कृत ग्रंथों को 300 खंडों में तिब्बती भाषा में अनुवादित किया. उन्होंने बेबाकी से कहा कि भारत ने नालंदा परंपरा खो दी है और उनकी नवीनतम प्रतिबद्धता आधुनिक भारत में प्राचीन भारतीय ज्ञान को पुनर्जीवित करना है. दलाई लामा एक कार्यक्रम धन्यवाद यूके कर्नाटक में बोल रहे थे., तिब्बती लोगों को आश्रय देने के लिए 'धन्यवाद भारत' निर्वासित तिब्बती सरकार का हिस्सा है.

नालंदा का है गौरवशाली अतीत

तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने कहा कि नालंदा मध्य युग के आक्रमणकारियों द्वारा नष्ट किया गया था और वह सबसे बड़ा मठ और बौद्ध शिक्षा केंद्र था.उन्होंने कहा कि भारत एकमात्र राष्ट्र था जो प्राचीन भारतीय ज्ञान को मन, मनोविज्ञान और विनाशकारी भावनाओं से निपटने के तरीके के बारे में बता सकता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने भारत की धर्मनिरपेक्ष परंपरा का सम्मान किया लेकिन नालंदा परंपरा के बारे में वह जो बात कर रहे थे, वह अकादमिक विषय है. 

 

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